हाल के वर्षों में 30 से 50 वर्ष की उम्र के बीच फिटनेस और जिम जाने वाले लोगों में हार्ट अटैक के मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है। आमतौर पर माना जाता है कि नियमित व्यायाम दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन कुछ मामलों में जिम में वर्कआउट करते समय या उसके तुरंत बाद दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि व्यायाम नुकसानदायक है, बल्कि कई छिपे हुए जोखिम कारक इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।

सबसे पहले, कई लोगों में पहले से मौजूद लेकिन अनडायग्नोज़्ड (अज्ञात) हार्ट कंडीशन होती है। जैसे कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज, ब्लॉकेज या जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएं, जो सामान्य जीवन में सामने नहीं आतीं, लेकिन भारी वर्कआउट के दौरान अचानक सामने आ सकती हैं।

दूसरा बड़ा कारण अत्यधिक और अचानक किया गया भारी व्यायाम है। जो लोग लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद अचानक बहुत अधिक वेट ट्रेनिंग या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू कर देते हैं, उनके दिल पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है, खासकर अगर शरीर उस स्तर की मेहनत के लिए तैयार न हो।

इसके अलावा, स्टेरॉयड और परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवाओं का उपयोग भी एक गंभीर कारण माना जा रहा है। कुछ लोग जल्दी मसल्स बनाने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट्स या एनाबॉलिक स्टेरॉयड का सेवन करते हैं, जो ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट रिदम को प्रभावित कर सकते हैं।

तनावपूर्ण जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ा रही है। 30 से 50 वर्ष की उम्र के बीच लोग अक्सर नौकरी, परिवार और आर्थिक दबाव के बीच रहते हैं, जिससे शरीर में लगातार स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते रहते हैं। यह स्थिति हृदय स्वास्थ्य को कमजोर कर सकती है।

नींद की कमी, गलत खान-पान, धूम्रपान, शराब का सेवन और मोटापा भी प्रमुख जोखिम कारक हैं। कई लोग फिट दिखने के लिए जिम तो जाते हैं, लेकिन उनकी डाइट और लाइफस्टाइल असंतुलित रहती है, जिससे शरीर को पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बिना मेडिकल चेकअप के भारी वर्कआउट शुरू करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासकर जिन लोगों के परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है, उन्हें व्यायाम शुरू करने से पहले जांच जरूर करानी चाहिए।

सही तरीका यह है कि व्यायाम धीरे-धीरे शुरू किया जाए, शरीर को समय दिया जाए और किसी भी तरह के असामान्य लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना या चक्कर आने को नजरअंदाज न किया जाए।

निष्कर्ष यह है कि जिम जाना अपने आप में खतरनाक नहीं है, बल्कि गलत तरीके, अत्यधिक दबाव और अनदेखे स्वास्थ्य जोखिम इसके पीछे मुख्य कारण बनते हैं। संतुलित व्यायाम, सही मार्गदर्शन और नियमित स्वास्थ्य जांच से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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