वैश्विक प्रगति, अवसंगठन की कमी और नीती शमीम ने PMMSY के तहत ₹1 ट्रिलियन का लक्ष्य दूर करने की बात कही

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत भारत ने समुद्री उत्पादों के निर्यात का ₹1 ट्रिलियन (₹1 लाख करोड़) का लक्ष्य रखा था, लेकिन FY25 में यह सपना अधूरा रह गया। मरीन एक्सपोर्ट ₹62,625 करोड़ पर अटक गया, यानी लक्ष्य से ₹37,375 करोड़ पीछे।

इस असफलता के पीछे कई बड़ी वजहें सामने आई हैं। वैश्विक बाजार में मांग घटी है, अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख खरीदार देशों में महंगाई और धीमी खपत ने झटका दिया। वहीं, देश में ठोस अवसंरचना और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी ने भी निर्यात को चोट पहुंचाई।

सीएमएफआरआई (CMFRI) के वैज्ञानिक एस. एस. राजू ने बताया कि कई शिपमेंट्स को एंटीबायोटिक अवशेष, ट्रेसबिलिटी और सर्टिफिकेशन में खामियों के कारण रिजेक्ट या डिले कर दिया गया। इससे भारत की छवि भी प्रभावित हुई।

गौरतलब है कि इस साल मछलीपालन मंत्रालय को कुल बजट का 90% यानी ₹2,352 करोड़ केवल PMMSY को दिया गया, इसके बावजूद उत्पादन, प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स में सुधार न हो सका।

हालांकि अप्रैल 2025 में मरीन एक्सपोर्ट में 20.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने बड़े लक्ष्य की भरपाई इसके बलबूते नहीं हो सकती। अब ज़रूरत है नए बाज़ारों (जैसे खाड़ी देश, दक्षिण कोरिया) की ओर रुख करने की, और उत्पाद विविधीकरण व सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की।

सरकार के लिए यह एक चेतावनी है कि केवल लक्ष्य तय करने से काम नहीं चलेगा — ज़मीन पर मजबूत तैयारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की समझ ज़रूरी है। अन्यथा “ब्लू इकॉनमी” का वादा बस लहरों में ही खो जाएगा।