सरकार ऐसे नियम तैयार कर रही है जो निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में प्रवेश की अनुमति दे सकते हैं। नए प्रस्तावित नियमों में कंपनियों की वित्तीय और तकनीकी क्षमता को परखने के लिए कुछ मापदंड शामिल हो सकते हैं
* एक निश्चित अवधि तक लगातार सकारात्मक राजस्व
* बड़े स्तर की अवसंरचना परियोजनाओं को संभालने का अनुभव
* मजबूत वित्तीय स्थिति और संचालन में स्थिरता
ये शर्तें तभी लागू की जाएंगी जब आवश्यक कानूनी संशोधन किए जाएंगे और उन्हें अधिसूचित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि केवल गंभीर और सक्षम कंपनियों को ही इस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी जाए। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में बताया कि भारत तीन प्रकार के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) पर भी काम कर रहा है
भारत में फिलहाल परमाणु ऊर्जा उत्पादन केवल सरकारी कंपनियों तक ही सीमित है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से न केवल उत्पादन क्षमता में तेजी लाई जा सकती है, बल्कि परियोजना लागत को भी घटाया जा सकता है—जो कि बढ़ती ऊर्जा मांग और उत्सर्जन में कटौती के बीच एक बड़ी चुनौती है।
सरकार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को संचालित करने की इच्छुक निजी कंपनियों के लिए विशेष पात्रता मानदंडों पर विचार कर रही है। इसके लिए *एटॉमिक एनर्जी एक्ट* और *सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट* जैसे प्रमुख कानूनों में बदलाव किए जा सकते हैं, जो अब तक केवल राज्य-नेतृत्व वाली परमाणु परियोजनाओं को ही समर्थन देते आए हैं।
