भारत के कृषि निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में सकारात्मक प्रदर्शन करते हुए वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूती दिखाई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल कृषि निर्यात 2.8% बढ़कर 52.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 51.12 अरब डॉलर था।
यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बाधाएं लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत का कृषि क्षेत्र स्थिर बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भले ही सीमित हो, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह एक सकारात्मक संकेत है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कुछ देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ ने निर्यात पर दबाव डाला है। इसके बावजूद भारतीय कृषि उत्पादों की मांग बनी हुई है।
भारत के कुल निर्यात प्रदर्शन की बात करें तो 2025-26 में देश के वस्तु निर्यात (goods exports) ने भी रिकॉर्ड स्तर छुआ है। यह आंकड़ा करीब 442 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो भारत की वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
हालांकि कृषि निर्यात में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। खासतौर पर चावल (rice) जैसे प्रमुख उत्पादों के निर्यात में गिरावट देखी गई है, जिसका एक बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव और कुछ बाजारों में मांग में कमी है।
इसके अलावा, अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में टैरिफ और व्यापार नीतियों के कारण कुछ कृषि उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है। वहीं, समुद्री उत्पाद (seafood) और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
इसके बावजूद, भारत ने अपने निर्यात बाजारों में विविधता (diversification) लाने पर जोर दिया है। नए देशों और क्षेत्रों में विस्तार करने की रणनीति के चलते भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ी है, जिससे कुल निर्यात पर दबाव कम हुआ है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि भविष्य में भारत को कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए गुणवत्ता (quality) और ब्रांडिंग (branding) पर अधिक ध्यान देना होगा। बेहतर पैकेजिंग, अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन और वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस करने से भारत अपनी वैश्विक हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है।
सरकार भी इस दिशा में कई कदम उठा रही है। कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां, सब्सिडी और लॉजिस्टिक्स सुधार पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और भारत को वैश्विक कृषि निर्यात में प्रमुख खिलाड़ी बनाना है।
कुल मिलाकर, 2025-26 में कृषि निर्यात में दर्ज हुई 2.8% की वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय कृषि क्षेत्र वैश्विक चुनौतियों के बावजूद लचीला (resilient) बना हुआ है। आने वाले समय में यदि गुणवत्ता सुधार, बाजार विस्तार और नीति समर्थन जारी रहता है, तो भारत कृषि निर्यात में और बड़ी छलांग लगा सकता है।

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