कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार को भारतीय बाजारों के सपाट या हल्की गिरावट के साथ खुलने के संकेत मिले हैं। निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव और उसके चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में आई तेजी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। तेल कीमतों में यह तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई, व्यापार घाटा और कॉर्पोरेट मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 और सेंसेक्स दोनों पर दबाव देखने को मिला। निफ्टी 50 करीब 0.43% गिरकर 24,222 के आसपास पहुंच गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स में भी लगभग 0.48% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार भावना कमजोर बनी हुई है।
बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर में भी दबाव देखा गया। एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट आई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे कुछ बड़े शेयरों में सीमित बढ़त दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है और इससे भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि कुछ कंपनियों के तिमाही नतीजों ने बाजार को थोड़ी राहत दी है। डाबर इंडिया, थर्मैक्स और कुछ हेल्थकेयर कंपनियों के बेहतर परिणामों के चलते उनके शेयरों में मजबूती देखी गई। दूसरी ओर ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई क्योंकि कंपनी की अंतरराष्ट्रीय बिक्री उम्मीद से कमजोर रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर बना हुआ है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है या हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है। इससे पहले भी तेल कीमतों में उछाल के चलते भारतीय बाजारों में तेज गिरावट देखी गई थी।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता बढ़ा रही है। लगातार बढ़ती तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव और तेल बाजार में अस्थिरता के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया की स्थिति भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।