भारतीय मेटल कंपनी Lloyds Metals & Energy अब Papua New Guinea (PNG) की ऐतिहासिक Panguna कॉपर माइन को दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। यह वही खदान है जो करीब चार दशक से बंद पड़ी है और जिसे दुनिया की सबसे बड़ी कॉपर और गोल्ड माइन में गिना जाता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने PNG में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्थापित की है, जो Panguna माइन के पुनर्विकास और संचालन के लिए दीर्घकालिक समझौते पर काम करेगी। Lloyds Metals को इस प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा “preferred partner” चुना गया है। (bloomberg.com)
Panguna माइन कभी Papua New Guinea की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार थी, लेकिन 1989 में गृह संघर्ष और हिंसा के कारण इसे बंद करना पड़ा था। यह संघर्ष बाद में एक बड़े गृहयुद्ध में बदल गया, जिसमें हजारों लोगों की जान गई। अब Bougainville प्रशासन इस माइन को फिर से शुरू करके क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Panguna माइन में लगभग 5.3 मिलियन टन कॉपर और 19.3 मिलियन औंस सोने का भंडार मौजूद है। ऐसे में यह परियोजना वैश्विक कॉपर सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में बढ़ती मांग के कारण दुनियाभर में कॉपर की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
Lloyds Metals ने हाल ही में Democratic Republic of Congo (DRC) में भी कॉपर उत्पादन शुरू किया है। कंपनी ने मार्च 2026 में 12,000 टन प्रति वर्ष क्षमता वाले कॉपर कैथोड प्लांट से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया था। इससे साफ है कि कंपनी अब आयरन ओर से आगे बढ़कर वैश्विक कॉपर बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहती है।
इस परियोजना का भू-राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा है। Bougainville सरकार ने पहले चीनी कंपनी CMOC के प्रस्ताव को अस्वीकार कर Lloyds Metals को प्राथमिकता दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
हालांकि, Panguna माइन को दोबारा शुरू करना आसान नहीं होगा। स्थानीय समुदायों की सहमति, पर्यावरणीय चिंताएं और राजनीतिक स्थिरता जैसे कई मुद्दे अभी भी मौजूद हैं। कंपनी फिलहाल ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया और संभावित समझौतों पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो Lloyds Metals वैश्विक कॉपर इंडस्ट्री में एक बड़ी खिलाड़ी बन सकती है। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय खनन क्षेत्र में मौजूदगी भी मजबूत होगी और देश की रणनीतिक धातु जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, Panguna कॉपर माइन का पुनरुद्धार केवल एक खनन परियोजना नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा और औद्योगिक बदलाव से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट कॉपर सप्लाई चेन और वैश्विक माइनिंग सेक्टर की दिशा बदल सकता है।

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